चाणक्य के अनुसार शारीरिक संबंध बनाने के बाद जरुरी है स्नान, जानें क्यों

हिन्दू धर्म के वेदों में सुबह जल्दी स्नान करने को स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम माना गया है। लेकिन नवीन जीवनशैली में सूर्य निकलने से पूर्व सभी के लिए नहाना संभव नहीं हो पाता। लेकिन यदि इन सब से हट कर केवल धर्म की बात की जाए तो हिन्दू धर्म में शारीरिक के साथ-साथ मानसिक और आत्मिक स्वच्छता के ऊपर काफी बल दिया गया है। समय के साथ इन नियमों में बदलाव हुए हैं लेकिन फिर भी ऐसे कई कार्य है जिनको करने के बाद स्नान करना जरुरी माना गया है।

आइये जानते है क्या हैं वे कार्य।

संभोग

संभोग 

स्त्री हो या पुरुष, शारीरिक संबंध बनाने के बाद नहाना आवश्यक है क्योंकि काम-क्रिया (सेक्स) के बाद स्त्री और पुरुष दोनों ही अपवित्र हो जाते हैं। अतः जब तक वे नहाएँगे नहीं तब तक किसी भी कार्य के लिए उपयुक्त नहीं माने जाएँगे।

शारीरिक संबंध

शारीरिक संबंध 

संभोग के बाद किसी भी धार्मिक क्रिया में शामिल होना अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए यह बहुत जरुरी है कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद स्नान अवश्य करें और स्नान करके ही अन्य किसी कार्य में शामिल हों।

प्रेम-प्रसंग

प्रेम-प्रसंग 

चाणक्य के अनुसार संभोग के बाद सबसे पहले नहाना चाहिए। नहाने से पूर्व घर की साफ़ सफ़ाई भी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि ऐसा करके आप घर को और गंदा कर रहे होते हैं। चाणक्य के अनुसार निम्नलिखित अवसरों पर भी नहाना अनिवार्य है।

तेल मालिश के बाद

तेल मालिश के बाद 

आचार्य चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को सप्ताह में एक बार पूरे शरीर में तेल मालिश अवश्य करनी चाहिए। लेकिन एक बात का ध्यान भी ज़रूर रखें कि तेल मालिश के बाद स्नान करना उतना ही जरूरी है जितना कि तेल मालिश करना।

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